उत्तराखंड के वैज्ञानिक भांग से बनाएंगे दवा, कैंसर जैसी बीमारी से मिलेगी राहत

किच्छा (मोहम्मद यासीन): पंतनगर सीमैप के वैज्ञानिकों की टीम ने अब भांग (कैनाबिस) से कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के इलाज का फॉर्मूला ढूंढ लिया है. इसके लिए सीमैप के वैज्ञानिकों ने हिमालयी क्षेत्रों से भांग की लगभग 60 प्रजातियों का चयन किया है. जिनसे अधिकतम टीएचसी-ए, सीबीडी और कैनाविनायड युक्त भांग की प्रजाति विकसित की गई है. सब कुछ ठीक-ठाक रहा तो जल्द ही भांग से निकलने वाले औषधीय तत्वों से कैंसर एवं अन्य गंभीर बीमारियों के लिए कारगर दवाइयां भी बनाई जाएंगी.

कैंसर, मिर्गी और डिप्रेशन में प्रयोग होने वाली दवाओं में जल्द ही भांग के पौधे से निकलने वाले तत्वों का प्रयोग किया जाएगा. सब कुछ ठीक-ठाक रहा तो अब कैंसर जैसी बीमारी की दवा उत्तराखंड में पाई जाने वाली भांग के पौधों से तैयार की जा सकेगी. सीएसआईआर (काउंसिल ऑफ साइंटिस्ट एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च) के उपक्रम सीमैप (केंद्रीय औषधीय एवं सगंध पौधा संस्थान) के वैज्ञानिकों द्वारा यह दावा किया जा रहा है. वैज्ञानिकों ने एक साल के शोध में पाया कि हिमालयी क्षेत्रो में पाए जाने वाले भांग के पौधों से निकलने वाले पदार्थों से गंभीर बीमारियों का इलाज संभव हो सकता है.

इसकी जानकारी मिलते ही मुंबई की एक संस्था ने सीमैप अनुसंधान केंद्र को 98 लाख रुपए की परियोजना जनवरी 2019 में सौंपी थी. इस परियोजना के तहत उच्च हिमालयी क्षेत्रों में पाई जाने वाले भांग के पौधों को एकत्रित कर प्रजनन विधि एवं सस्य तकनीकों द्वारा उच्च गुणवत्ता युक्त प्रजाति एवं सस्य विधि से भांग की पौध तैयार की गई है. जिसमें वैज्ञानिकों को कुछ हद तक सफलता भी प्राप्त हो चुकी है. जल्द ही भांग की नई प्रजाति से रासायनिक तत्व टीएचसी, सीबीडी, केनाविनायड और टीएचसी-ए के प्रयोग से कई प्रकार की असाध्य बीमारियों जैसे कैंसर, मिर्गी, डिप्रेशन आदि की दवा बनाने में मदद मिलेगी. अभी तक विकसित की गई प्रजाति में वैज्ञानिकों की टीम ने टीएचसी की मात्रा साढ़े 11 प्रतिशत तक पहुंचा दी है. वैज्ञानिक इसे ओर अधिक बढ़ाने में जुटे हुए हैं.

सीमैप के वैज्ञानिक राकेश उपाध्याय ने बताया कि वैज्ञानिकों की टीम ने उत्तराखंड के हिमालयी क्षेत्रों में पाई जाने वाली भांग की 60 प्रजातियों को एकत्रित कर उच्च कोटि की भांग की पौध तैयार की है. जिसमें उन्हें सफलता भी मिल गयी है. उन्होंने बताया कि वैज्ञानिकों की टीम ने तैयार की गई प्रजाति में साढ़े 11 प्रतिशत टीएचसी भी पहुंच चुका है. वैज्ञानिक ने दावा किया है कि सब कुछ ठीक रहा तो जल्द ही भांग से निकलने वाले तत्वों से कैंसर, मिर्गी और डिप्रेशन की दवाएं बनाई जाएंगी.भांग में कई औषधीय गुण पाए जाते हैं. विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक दुनिया की करीब 2.5 फ़ीसदी आबादी यानी 14.7 करोड़ लोग इसका इस्तेमाल करते हैं. दुनिया में इसका इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है.

भांग के सही इस्तेमाल के फायदे

1:भांग सीखने और याद करने की क्षमता बढ़ाती है. अगर भांग का उपयोग सीखने और याद करने के दौरान किया जाता है तो भूली हुई बातें आसानी से याद की जा सकती है.

2:भांग का इस्तेमाल कई मानसिक बीमारियों में भी की जाती है. जिन्हें एकाग्रता की कमी होती है, उन्हें डॉक्टर इसके सही मात्रा के इस्तेमाल की सलाह देते हैं.

3:जिन्हें बार-बार पेशाब करने की बीमारी होती है, उन्हें भांग के इस्तेमाल की सलाह दी जाती है.कान का दर्द होने पर भांग की पत्तियों के रस को कान में डालने से दर्द से राहत मिलती है.

4:जिन्हें ज़्यादा खांसी होती है, उन्हें भांग की पत्तियों को सुखा कर, पीपल की पत्ती, काली मिर्च और सोंठ मिलाकर सेवन करने की सलाह दी जाती है.

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