नवरात्र स्पेशल : माँ भगवती का क्यों पड़ा चंडी देवी नाम, क्या है रौद्र रुप के पीछे का कारण

हरिद्वार : नवरात्र शुरू हो चुके है आज पहले नवरात्र के दिन हरिद्वार के शक्तिपीठ सहित माँ मनसा देवी व् चंडी देवी मंदिर में भारी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे. आप को बता दें की हरिद्वार में माँ चंडी देवी का मंदिर पौराणिक है महिषासुर राक्षस का वध कर माँ ने यहां दर्शन दिए थे, मां चंङी देवी, यानि असुरों का संहार करने वाली मां चंडी देवी, देवताओं के प्राणो की रक्षा करने वाली मां चंडी देवी और भगवान राम के प्राण बचाने वाली भी मां चंङी देवी। यानि अपने भक्तों की सभी मनोकामनाओं को पूरा करने वाली मां चंङी का यह मंदिर पुराणो में वर्णित है और जिस नील पर्वत पर स्थित है यह मंदिर, उसके कण कण में हैं मां का वास। मां चंङी देवी के इस मंदिर की महिमा देवी भागवत में भी कही गई है। नवरात्रो के दौरान इस मंदिर में भक्तों का तांता लगा रहता है। मनोकामना सिद्ध मन्दिर में माता का रूप देखते ही बनता है आइये आप को दिखाते है महिमा चंडी देवी की-

रोद्र रुप में आ गई थीं चंड़ी देवी

हरिद्वार के पौराणिक मंदिरों में शुमार है माँ चंडी का ये मंदिर, भगवती का यह मंदिर सिद्ध पीठ है और माना जाता है कि मां भगवती यहाँ पर अपने रौद्र रूप यानि चंङी रूप में साक्षात विराजती है। पुराणो के अनुसार जब देव लोक में असुरों का अत्याचार बढने लगा तो देवताओं ने मां भगवती की स्तुति की तो मां चंङी रूप एक खंभ को फाङ कर यहाँ स्वर्ग से सीधे प्रकट हुई। इसलिए मां भगवती को चंडी देवी का नाम से जाना जाता है. मान्यता है की नवरात्र के दौरान नौ दिन यहीं पर विराजती हैं। यही कारण है की नवरात्रो  के दौरान इस मंदिर में देश दुनिया से श्रद्धालु भारी संख्या में यहाँ मन्नत मांगने आते हैं।

ऐसी माया मानों कोई आलौलिक ताकत आपको अपनी ओर खींच रही हो

मां चंङी देवी इस नील पर्वत पर विराजती हैं। हरिद्वार से गंगा नदी का एक किलोमीटर से लंबा पुल पार करके श्रद्धालु पहुंचते हैं मंदिर जाने के लिए बने हुए रास्ते पर। मंदिर जाने के लिए दो रास्ते हैं। पैदल करीब सवा दो किलोमीटर का रास्ता मंदिर तक जाने के लिए तय करना पङता हैं। इसके अलावा यदि यात्रा को रोंमांचक बनाना हो तो इसके लिए मंदिर तक पहुंचने के लिए यहाँ पर लगा हुआ हैं रोप वे।जिसमें बैठ कर मंदिर जाते हुए दूर दूर तक पहाङों और घाटियों के साथ ही हरिद्वार शहर के रोंमाचक नजारों का लुफ्त आपकी यात्रा के आनन्द को कई गुना बढा देता हैं।इसके बाद मंदिर में पहुंच कर ऐसा अहसास होने लगता हैं कि कोई आलौलिक ताकत आपको अपनी ओर खींच रही हो।

दिव्यांगों को मंदिर तक लाने लेजाने के लिए व्हीलचेयर और डोली की व्यवस्था

ट्रस्ट द्वारा यहां शुद्ध RO पानी की व्यवस्था की गयी है,दिव्यांगों को मंदिर तक लाने लेजाने के लिए व्हीलचेयर और डोली की व्यवस्था भी की गयी है, मंदिर में मां चंङी देवी की दो प्रतिमांए हैं ।मंदिर में ठीक सामने मां का मंगल रूप हैं जबकि बायें और कोने में एक खंबें में मां का रौद्र रूप हैं जो कि मां का असली रूप हैं।पोराणिक महत्त्व रखने वाले इस मंदिर में आने वाले श्रद्धालु मानते हैं की यहाँ पर हर मनोकामना पूर्ण होती है.

नवरात्र के दौरान विशेष पूजा और अनुष्ठान किये जाते हैं

श्रद्धालु रविकांत शर्मा ने बताया की मां चंङी देवी के मंदिर में साल में दो बार नवरात्र के दौरान विशेष पूजा और अनुष्ठान किये जाते हैं। इसके पीछे भी मान्यता हैं कि इन दिनों संसार की सभी आदि शक्तियां मां के आवहान पर यहाँ पर इकठ्ठा होती हैं। सच्ची कामना के साथ यहाँ आने वाले भक्तों की सभी मनोकामना पूरी होती है यही से भगवती ने दैत्यों का संहार किया था ! साथ ही हरिद्वार में मायादेवी शक्तिपीठ की विशेष पूजा की जाती है !हमने भी आज नवरात्र के पहले दिल कलश स्थापित कर अम्बे को विराजमान किया है.

ये भी है मान्यता

माँ अम्बे अनन्य रूप हैं और इन्ही रूपो में मां करती हैं अपनों भक्तों पर कृपा,मां चंङी देवी को तन्त्र मंत्र की सिद्धिदात्री भी माना जाता हैं. माना जाता है कि एक बार भगवान् शंकर ने भी मंगलवार के दिन मां चंङी की उपासना की थी ताकि मां त्रिपुर नाम के एक दैत्य का वध कर सके, सभी देवतागण  भी मां की पूजा करते हैं,मां के चरणों में जो भी आता हैं, सच्चे मन से मां की आराधना करता है मां उसकी मनोकामना जरूर पूरी करती हैं !

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