टिहरी में गजब का प्रबंध : जनरेटर के लिए तेल नहीं, ठेकेदार मौज में और जनता सोच में

टिहरी : टिहरी जिले के बालगंगा तहसील लाटा में जनता बिजली कटौती की मार झेल रही है. अपना काम काज छोड़ कर लोग तहसील में अपने काम के लिए आते हैं लेकिन बिजली की मार उनका समय-पैसा तो बर्बाद कर ही रही है साथ ही उनको इस बारिश में समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है. आपको बता दें कि लोग अपनी जान पर खेलकर रोज तहसील में अपने काम के लिए आते हैं क्योंकि बालगंगा तहसील आपदा के हिसाब से भी अति सेवन्दनशील क्षेत्र है। लेकिन बिजली कटौती के कारण उनको निराश लौटना पड़ता है. लोग 20 रुपये के काम के लिए 200 रुपये खर्च करते तहसील पहुंच रहे हैं लेकिन वहां सिस्टम की नाकामयाबी देखने को मिल रही है.इससे लोगों में खासा रोष है.

जेनरेटर तो है लेकिन चालू करने के लिए तेल नहीं

बतादें कि बालगंगा तहसील लाटा मेें परिसर में गजब का प्रबंधन है. तहसील में जेनरेटर तो है लेकिन तेल और रख रखाव के अभाव में कई समय से जनरेटर बन्द पड़ा हुआ है. डेढ़ महीने से बालगंगा तहसील क्षेत्र के लोग लगातार बिजली कटौती की मार झेल रहे हैं। बिजली कटौती से तहसील में कामकाज ठप्प पड़ जाता है लोग घंटों लाइट आने का इंतजार करते रहते हैं. इस पर सीमान्त गाँव मेड मारवाड़ी से आने वाले लोगों का कहना है कि 200 रुपये किराया खर्च करने के बाद भी उनके खाता खतौनी जैसे जरूरी कागज भी नहीं बन पा रहें है.

वहीं के कर्मचारियोंका भी कहना है कि लगातार इस प्रकार की समस्या बनी हुई है. डेढ़ महीने से लगातार बिजली कटौती हो रखी है.

बिजली विभाग ने झाड़ा पल्ला

वहीं इस पर बिजली विभाग अपना पल्ला झाड़ता हुआ नजर आया. बिजली विभाग का कहना है कि उन्होंने विभाग की ओर से ठेकेदार को इस क्षेत्र की राखरखाव का पूरा जिम्मा दे दिया है औऱ कर्मचारी भी बढ़ाये गए हैं लेकिन हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं। बिजली विभाग ने जल्द बिजली आपूर्ति की बात कही। एक तरफ जहां ठेकेदारों को काम का फायदा पहुंच रहा है तो वहीं दूसरी तरफ क्षेत्र की जनता बिजली कटौती से उपजने वाली समस्यायों से त्राही-त्राही कर रही है। पूरे तहसील क्षेत्र की व्यवस्था देखने वाले बालगंगा तहसील कार्यालय लाटा की दशा ही खुद ही देखने लायक बनी हुई है।

जनता के खून पसीने के पैसा उनकी छोटी सी बुनयादी जरूरतों के लिए लुटता जा रहा है

एक तरफ टिहरी जैसे विशालकाय बांध में सी प्लेन उतारने जैसे भारी भरकम सौदे किये जा रहे हैं तो वहीं बिजली जैसी बुनियादी जरूरतों के बिना लोगों का काफी पैसा और समय बर्बाद हो रहा है। हालात यह है कि बिजली विभाग के बेलगाम ठेकेदार मालदार होते जा रहे हैं और गरीब जनता के खून पसीने के पैसा उनकी छोटी सी बुनयादी जरूरतों के लिए लुटता जा रहा है। अब तो हालात यह हो चुके हैं कि जब दिन भर की कटौती से भी विभाग का मन नहीं भर रहा है तो रात को भी बिजली कटौती तबियत से कर रहे हैं।

सिस्टम की बहुत बड़ी नाकामयाबी बताता है तहसील के ये हालात

लोगों द्वारा बार बार बिजली विभाग के अधिकारियों को इसकी शिकायत की जा रही है लेकिन हालत सुधरने की जगह और बिगड़ते जा रहे हैं। एक गरीब आदमी 20 रुपये की खाता खतौनी के लिए 200 से भी अधिक रकम खर्च कर औऱ एक दिन से भी ज्यादा समय लगाने पर भी उसे प्राप्त नहीं कर पा रहा है जो की सिस्टम की बहुत बड़ी नाकामयाबी बताता है.

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