हरिद्वार AUDIO VIRAL : मुख्य चिकित्सा अधिकारी की बेरुखी, काटा फोन, क्या कोरोना से ऐसे लड़ेगा राज्य?

हरिद्वार : दुनिया भर में कोरोना की दहशत है और ये दहशत अब देश में भी फैल गई है। जिससे लड़ने के लिए मोदी सरकार कई कड़े कदम उठा रही है। वहीं लॉक डाउन के बीच जहां सरकार ने चिकित्सा अधिकारियों और सभी हॉस्पिटलों को सजग रहने के निर्देश दिए तो वहीं इन आदेशों की धज्जियां उड़ाती दिखीं हरिद्वार की मुख्य चिकित्सा अधिकारी सरोज नैथानी…जी हां संकट की घड़ी में मुख्य चिकित्सा अधिकारी सरोज नैथानी की बेरुखी। वह इस संकट की घड़ी में किसी का फोन तक नहीं उठा रही हैंं और उठा रहीं है तो फोन काट दिया जा रहा है। क्या राज्य ऐसे कोरोना से लड़ेगा।

पूरे देश के साथ हरिद्वार में भी कोरोना अलर्ट जारी है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी सरोज नैथानी मैडम किसी का फोन उठा नहीं रही और सरकारी नंबर भी बंद कर रखा है। प्रभारी मंत्री सतपाल महाराज द्वारा हाल ही में मीटिंग ली गई थी और इस मीटिंग में निर्देशित किया गया था की कोई भी सरकारी नंबर बंद ना किया जाए आप देख सकते हैं की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद मॉनिटरिंग कर रहे हैं और ये कहा जा रहा है की कोई कभी किसी भी समय फोन कर सकते हैं।

बता दें कि हरिद्वार में कुछ जगह परिस्थितियां ऐसी हो रही है की डॉक्टर मरीज का इलाज नहीं कर रहे इस वजह से लोग काफी परेशान है इसका खामयाजा ब्रह्मपुरी में एक युवक की मौत के बाद सामने आया है ,युवक के परिवार वाले सरकारी हॉस्पिटल में जाने के बाद इलाज न मिलने के बाद प्राइवेट हॉस्पिटल का रुख करते है जहां उन्हें निराशा मिलती है इसके बाद उनको लगता है की हमारी मदद सायद पत्रकार कर सकते है लेकिन यहां भी उनको सिर्फ निराशा के सिवाय कुछ नहीं मिलता और कुछ समय में ही युवक की मौत हो जाती है वहीं पता चलता है की पत्रकारों द्वारा कोशिश की गयी थी लेकिन मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने गैर जिम्मेदारी का परिचय दिया ,फोन कॉल के मुताबिक एक कॉल को उन्होंने कुछ समय सुनने के बाद ही काट दिया और दूसरी कॉल में कहा बेटा तोडा रुक कर बात करना और फोन काट दिया।

मामला हरिद्वार के ब्रह्मपुरी क्षेत्र का है जहां पर युवक को लेकर उसका परिवार दर-दर भटकता हरिद्वार के सरकारी गैर सरकारी हॉस्पिटल लेकिन किसी ने उसकी एक न सुनी। हरिद्वार के बंगाली हॉस्पिटल, हरिद्वार के सिटी हॉस्पिटल से लेक्रर पर कहीं भी उसको इलाज ना मिलने कारण उसकी मौत हो गई। जिससे ब्रह्मपुरी इलाके के निवासियों में काफी रोष है। वहीं सूबे के अधिकारियों पर सवालिया निशान खड़ा होता है।

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