
समान नागरिक संहिता (UCC) को उत्तराखंड में लागू किए 1 साल पूरा हो गया है। इसी क्रम में आज प्रदेश में समान नागरिक संहिता दिवस मनाया गया है। हिमालयन कल्चरल सेंटर गढ़ी कैंट में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शिरकत की। इस दौरान सीएम ने UCC को तैयार करने वाले समिति के सदस्यों को सम्मानित किया।
UCC को लागू किए उत्तराखंड में हुआ 1 साल
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि आज का दिन उत्तराखंड राज्य के इतिहास में स्वर्णिम अध्याय के रूप में अंकित रहेगा। इसी दिन राज्य में यूसीसी लागू हुई है, जिससे समाज में सामाजिक न्याय, समानता और संवैधानिक मूल्यों की स्थापना सुनिश्चित हो सकी। उन्होंने कहा कि सनातन संस्कृति और परंपरा सदैव समरसता और समानता की संवाहक रही है।
सीएम ने कहा कि बाबा साहब डॉ भीमराव आंबेडकर सहित सभी संविधान निर्माताओं ने ‘‘समान नागरिक संहिता’’ को संविधान के अनुच्छेद 44 के अंतर्गत राज्य के नीति निर्देशक सिद्धांतों में सम्मिलित किया था। उनका मत था कि देश के सभी नागरिकों के लिए एक समान कानून होना चाहिए। यही कारण है कि पीएम मोदी के मार्गदर्शन में उन्होंने 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले, अपने दृष्टिपत्र में राज्य में UCC को लागू करने का संकल्प लिया।
11 मार्च 2024 को मिली थी राष्ट्रपति से स्वीकृति
मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने दोबारा सत्ता संभालते ही पहले दिन से ही उत्तराखंड में यूसीसी लागू करने के लिए कार्य शुरू किया। इसी क्रम में 7 फरवरी 2024 को समान नागरिक संहिता विधेयक को राज्य विधानसभा में पारित कर राष्ट्रपति को भेजा गया, जिसे 11 मार्च 2024 को स्वीकृति मिली। इसके बाद सभी आवश्यक नियमावली और प्रक्रियाओं को पूर्ण करते हुए, राज्य सरकार ने 27 जनवरी, 2025 को उत्तराखंड में यूसीसी को विधिवत रूप से लागू कर दिया।
लागू करने के बाद राज्य से सभी नागरिकों को मिल रहा समान अधिकार: CM
सीएम ने कहा कि समाज में कुछ समुदायों के लिए अलग-अलग व्यक्तिगत कानूनों के कारण भेदभाव, असमानता और अन्याय की स्थिति बनी हुई थी। UCC लागू होने से न केवल राज्य से सभी नागरिकों को समान अधिकार प्राप्त हुए हैं, बल्कि प्रदेश में महिला सशक्तिकरण के एक नए युग की शुरुआत भी हुई है। अब उत्तराखंड की मुस्लिम बहन-बेटियों को हलाला, इद्दत, बहुविवाह, बाल विवाह और तीन तलाक जैसी कुरीतियों से मुक्ति मिली है।
यूसीसी लागू होने के बाद हलाला या बहुविवाह पर लगी रोक
सीएम ने कहा यूसीसी लागू होने के बाद उत्तराखंड में एक भी हलाला या बहुविवाह का मामला सामने नहीं आया। यही कारण है कि मुस्लिम महिलाओं ने इस कानून का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता के बाद कई दशकों तक वोट बैंक की राजनीति के कारण, यूसीसी को लागू करने का साहस नहीं दिखाया गया। जबकि दुनिया के सभी विकसित और सभ्य देशों सहित प्रमुख मुस्लिम राष्ट्रों में समान नागरिक संहिता पहले से ही लागू है।
कानून के माध्यम से नहीं बदला मान्यता
मुख्यमंत्री ने कहा कि UCC किसी धर्म या पंथ के खिलाफ नहीं है बल्कि ये तो समाज की कुप्रथाओं को मिटाकर सभी नागरिकों में “समानता से समरसता’’ स्थापित करने का एक कानूनी प्रयास है। इस कानून के माध्यम से किसी भी धर्म की मूल मान्यताओं और प्रथाओं को नहीं बदला गया है, केवल कुप्रथाओं को दूर किया गया है। यूसीसी में सभी धर्मों के लोगों के लिए विवाह, विवाह-विच्छेद एवं उत्तराधिकार आदि से संबंधित नियमों को एक समान किया गया है। साथ ही संपत्ति के बंटवारे और बाल अधिकारों के विषय में भी स्पष्ट कानून बनाए गए हैं।
ये भी पढ़ें: पहचान छुपाकर शादी करने पर सख्त हुआ UCC, अब विवाह होगा अमान्य और चलेगा मुकदमा
सीएम ने कहा संपत्ति के अधिकार में बच्चों में किसी भी प्रकार का भेद नहीं किया गया है, किसी भी व्यक्ति की मृत्यु होने के पश्चात उसकी संपत्ति को लेकर परिवार के सदस्यों के बीच किसी प्रकार के मतभेद की स्थिति उत्पन्न न हो, इसके लिए मृतक की सम्पत्ति पर उसकी पत्नी, बच्चों और माता-पिता को समान अधिकार प्रदान किए गए हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान समय को देखते हुए युवक-युवतियों की सुरक्षा सुनिश्चित के उद्देश्य से इस कानून में लिव-इन रिलेशनशिप के लिए पंजीकरण अनिवार्य किया गया है। पंजीकरण कराने वाले युगल की सूचना रजिस्ट्रार उनके माता-पिता या अभिभावक को देगा, ये जानकारी पूर्णतः गोपनीय रखी जा रही है। लिव-इन के दौरान जन्में बच्चों को उस युगल का बच्चा ही मानते हुए, उसे जैविक संतान के समान समस्त अधिकार प्रदान किए गए हैं।