उत्तरकाशी में भारत-चीन को जोड़ने वाला वैली ब्रिज बनकर हुआ तैयार

उत्तरकाशी- गंगोत्री हाईवे पर गंगोरी के पास टूटे वैली ब्रिज के स्थान पर सीमा सड़क संगठन ने नया वैली ब्रिज तैयार कर दिया है। 190 फीट लंबे इस वैली ब्रिज को तैयार करने में सीमा सड़क संगठन को सात दिन का समय लगा। बीआरओ के ऑफिसर कमांडेंट मेजर सरजीत मोहंती ने बताया कि पुल तैयार कर दिया गया है। आज सोमवार से पुल पर वाहनों की आवाजाही हो जाएगी।

14 दिसंबर 2017 की सुबह को टूट गया था पुल

भारत-चीन सीमा को जोड़ने वाला गंगोत्री हाईवे पर 2012 में बना वैली ब्रिज 14 दिसंबर 2017 की सुबह को टूट गया था। 24 घंटे के अंतराल में बीआरओ ने असी गंगा नदी में बड़े-बड़े तीन पाइप डालकर वैकल्पिक रास्ता बनाया। जिसके बाद 16 दिसंबर से 22 दिसंबर तक बीआरओ ने टूटे पुल का खोलने का कार्य किया। नए पुल निर्माण के लिए गौचर, ऋषिकेश, नरेन्द्र नगर, रामगढ़ से पुल निर्माण का सामान मंगवाया।

1 जनवरी 2018 को बीआरओ ने शुरु किया वैली ब्रिज का निर्माण कार्य

एक जनवरी 2018 को बीआरओ ने वैली ब्रिज का निर्माण कार्य शुरू किया। सात जनवरी की शाम को वैली ब्रिज तैयार किया गया। इस पुल को तैयार करने के लिए बीआरओ के 150 श्रमिक व कर्मचारी जुटे रहे। बीआरओ के ऑफिसर कमांडेंट मेजर सरजीत मोहंती ने बताया कि पुल की एप्रोच रोड तैयार कर सोमवार से पुल पर वाहनों की आवाजाही शुरू हो जाएगी। उन्होंने बताया कि पुल पर एक समय में एक ही वाहन जाए इसके लिए सूचना बोर्ड लगाए जाएंगे। यह पुल राष्ट्रीय संपदा है इस लिए सभी की जिम्मेदारी है कि इस संपदा की सुरक्षा करें। उन्होंने बताया कि इस पुल की भार क्षमता 18 टन है।

 

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