उत्तराखंड : एक जिला ऐसा भी जहां सड़क को देख बच्चों ने शिक्षक से पूछा ये क्या है

एक तरफ देश के पीएम नेरंद्र मोदी बुलेट ट्रेन लाने की बात करते हैं तो दूसरी तरफ आलम ये है कि बच्चों ने सड़क को देखकर ये पूछ डाला की ये क्या चीज है.

हम बात कर रहे उत्तराखंड के चमोली जिले के गांवों के बारे में. यहा कुछ गांव ऐसे भी हैं जहां बच्चों को यह तक पता नहीं कि सड़क कितनी चौड़ी होती है। दो-दिवसीय शैक्षिक भ्रमण के तहत जब सोमवार को राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय डुमक के 24 छात्र-छात्राएं भराड़ीसैंण पहुंचे तो इनमें 20 छात्र-छात्राएं ऐसे थे, जिनकी दुनिया गांव तक ही सिमटी हुई है।

सड़क देख और उसे दौड़ता देख बच्चे सकपका गए

इन नौनिहालों ने पहली बार सड़क देखी और उस पर दौड़ रहे वाहनों को देख हैरान गए। कुछ बच्चों ने तो शिक्षकों से सवाल तक कर डाला कि यह क्या चीज है। साथ ही गैरसैंण में विधानसभा भवन समेत अन्य भवनों को देख हैरान रह गए. औऱ कहने लगे इतने बड़े भी घर होते हैं क्या। इसके अलावा मछली का दीदार भी इन नौनिहालों ने पहली बार किया। गांव से बाहर इस नई दुनिया को देख वह खुशी से फूले नहीं समा रहे थे।

चमोली जिले के जोशीमठ विकासखंड स्थित डुमक गांव जाने के लिए बदरीनाथ हाईवे पर पीपलकोटी से चार किमी आगे पाखी से 29 किमी की दूरी पैदल तय करनी पड़ती है। इसी गांव में स्थित राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय डुमक के 24 छात्र-छात्राएं शैक्षिकभ्रमण पर गैरसैंण पहुंचे थे।

शिक्षकों ने बताया कि यह बस है, जिसमें बैठने पर पैदल यात्रा नहीं करनी पड़ती

29 किमी पैदल चलकर जब वह रोड हेड पर पाखी पहुंचे तो सड़क को देख उनकी आंखें फटी की फटी रह गई। सड़क पर वाहन को देख पहले तो वे सकपकाए और फिर उसके पीछे दौड़ने लगे। तब शिक्षकों ने बताया कि यह बस है, जिसमें बैठने पर पैदल यात्रा नहीं करनी पड़ती।

बस में बैठकर तो ये नौनिहाल मानो किसी दूसरे लोक में पहुंच गए

बस में बैठकर तो ये नौनिहाल मानो किसी दूसरे लोक में पहुंच गए। जैसे-जैसे बस आगे बढ़ रही थी, उनका कौतुहल भी बढ़ता जा रहा था। गैरसैंण पहुंचने पर तो विधानसभा भवन समेत अन्य ऊंची इमारतों ने उन्हें सम्मोहित-सा कर दिया। गांव के पहाड़ी पत्थर वाले कच्चे मकानों के सिवा उन्होंने आज कोई पक्की इमारत देखी ही नहीं थी।

शैक्षिक दल के मुखिया एवं राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय डुमक के प्रधानाध्यापक रुद्र सिंह राणा ने बताया कि पहली बार सड़क, बस, ऊंची इमारतें व मछलियां देखकर बच्चों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। इस दल में सहायक अध्यापक विष्णु प्रसाद भट्ट व युद्धवीर सिंह नेगी भी शामिल थे।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here