उत्तराखंड-40 छात्रों के लिए 1 दिव्यांग शिक्षक, ऐसे में कैसे पढ़ेगा और बढ़ेगा इंडिया

चमोली : सालों के 13 जिलों के उत्तराखंड में शायद ही कोई जिला कोई, तहसील ऐसा बचा हो जहां के स्कूलों में कभी भवनों का अभाव तो कभी छात्रों का अभाव तो कभी शिक्षकों के अभाव की खबरें न उठी हों. सूबे के शिक्षा विभाग में कभी शिक्षक धरने पर हैं तो कभी अभिभावक धरने पर हैं तो कभी बीएड, btc प्रशिक्षु शिक्षक बनने की चाह पाले धरने पर हैं. इस लिहाज से उत्तराखंड को हड़ताली प्रदेश कहा जाना गलत नहीं होगा. जहां एक ओर शिक्षा निदेशालय के बाहर शिक्षक समुदाय अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहा हैं वहीं दूसरी ओर अभिभावक अपने पाल्यों की उचित शिक्षा दीक्षा को ध्यान में रखते हुए शिक्षा संस्थानों और शिक्षा कार्यालयों में प्रदर्शन कर रहे हैं.

विद्यालय में तैनात एकमात्र शिक्षक शारिरिक रूप से अक्षम जिन्हें सम्भालना होता है प्रधानाचार्य का चार्ज भी 

हम बात कर रहे हैं थराली विकासखण्ड के राजकीय प्राथमिक विद्यालय तलवाड़ी की जहां एकमात्र शिक्षक के भरोसे गांव के 40 बच्चों का भविष्य दांव पर लगा है. अभिभावकों की मानें तो विद्यालय में तैनात एकमात्र शिक्षक भी शारिरिक रूप से अक्षम और दिव्यांग हैं, जिन्हें प्रधानाचार्य का चार्ज भी सम्भालना होता है. 40 बच्चों को पढ़ाना भी होता है और इसके साथ ही शिक्षा विभाग की कई मासिक और साप्ताहिक कई बैठकों में भी शिरकत करनी होती है जिसके चलते यहां पढ़ रहे40 बच्चों का भविष्य दांव पर है

ग्रामीण शिक्षकों की मांग के लिए खंड शिक्षा कार्यालय थराली भी पहुंचें. जहां सभी अभिभावकों और ग्रामीणों ने बच्चों के भविष्य से हो रहे खिलवाड़ से खंड शिक्षा अधिकारी को अवगत कराया और मांग की है कि जल्द से जल्द इस प्राथमिक विद्यालय में शिक्षकों की तैनाती की जाय. क्योंकि यहां पर तैनात एकमात्र शिक्षक भी दिव्यांग हैं और ऊपर से विभागीय कामकाज के चलते बच्चों को ठीक से पढ़ा भी नहीं पाते.

सरकार देती है सब पढ़े सब बढ़े का नारा 

अभिभावकों ने सरकार और शिक्षा विभाग को घेरते हुए कहा कि एक ओर सरकार सब पढ़े सब बढ़े का नारा देती है सर्व शिक्षा अभियान में करोड़ो खर्च कर सरकारी स्कूलों में पढ़ाने के लिए अभिभावकों ओर छात्रों को प्रेरित किया जा रहा है और दूसरी ओर विद्यालय महज एक शिक्षक के भरोसे चल रहे हैं जिसका नतीजा है कि कई विद्यालयों में छात्र संख्या लगातार घट रही है. कई विद्यालय ऐसे भी जहां छात्र संख्या महज 10 और शिक्षक 3 से 4 तक संख्या में हैं. वहीं 40 बच्चों के इस विद्यालय में महज एक दिव्यांग शिक्षक को नियुक्त किया गया है.

वहीं जिला शिक्षा अधिकारी ललितमोहन चमोला ने बताया कि मामला उनके संज्ञान में है और जल्द से जल्द इस विद्यालय में अतिरिक्त शिक्षकों की तैनाती की जाएगी.

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