खेल मंत्री के पास यौन शोषण के सबूत तो फिर क्यों हिचक रही कार्रवाई से सरकार!

देहरादून- उत्तराखंड में जीरो टालरेंस का दौर है, सूबे के खेलमंत्री अरविंद पांडे के पास खेल संघों के संगीन जुर्म के सबूत हैं। बावजूद इसके मुख्यमंत्री कहते हैं पीड़िताओं को सामने आना चाहिए।  दरअसल पिछले दिनों राज्य के खेल मंत्री मीडिया में राज्य के खेल संघों की खिलाड़ियों पर हावी गुंडागर्दी को खत्मा करने का वादा कर चुके हैं।
राज्य के खेल मंत्री अरविंद पांडे खेल संघों के कई पदाधिकारियों पर न माफ किया जाने वाला आरोप न केवल मढ़ चुके हैं बल्कि उनका दावा है कि उनके पास  ऐसे सबूत हैं जो राज्य में खेल संघों पर हावी ऐसे पदाधिकारियों को बेनकाब कर देंगे जिन पर धारा 376 के तहत मुकदमा दर्ज हो सकता है।
खेल मंत्री ने पिछले दिनों बडे भावुक अंदाज में कहा भी था कि खेल संघों में कई ऐसे पदाधिकारी है जिनकी वजह से बच्चियों का भविष्य खराब हो रहा है। बावजूद इसके आज सूबे के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत कहते हैं कि शोषण का शिकार महिला खिलाड़ियों को आगे आकर शिकायद दर्ज करवानी चाहिए।
ऐसे में सवाल उठता है कि, क्या सरकार में तालमेल का आभाव है, या सूचना क्रांति के दौर में भी मंत्री के बयान से सीएम साहब वाकिफ नहीं है !  सवाल ये भी है कि आखिर खेल मंत्री ने अपने सबूतों को सीएम से अब तक शेयर क्यों नहीं किया?  या फिर सूबे के खेल मंत्री ही खेल संघों पर हावी दुर्दांत चेहरों को सबूतों के आधार पर सजा दिलवाने का काम क्यों नहीं करते? आखिर इतने संगीन मामले में भी सरकार हाथ डालने से हिचक क्यों रही है?
क्या जीरो टॉलरेंस सिर्फ शब्दों की बाजीगरी है जो भाषण या मीडिया में बयान की खूबसूरती बढ़ा देता है या हकीकत में भी कोई चीज है। वैसे भी माना जाता है कि जुर्म छिपाना, जुर्म से बड़ा जुर्म है।

खेल मंत्री के पास पुख्ता सबूत, खेल संघों के कई पदाधिकारियो पर चल सकता है रेप का केस! देखिए वीडियो

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