मासूमों की मजबूरी- इस सरकारी स्कूल के हैंडपंप का पानी आप ‘पी’ तो क्या ‘छू’ भी नहीं सकते!

लक्सर (गोविंद सिंह) – देश में स्वच्छ भारत अभियान चल रहा है इधर उत्तराखंड में जीवन दायनी गंगा को स्वच्छ निर्मल बनाने के लिए करोड़ो रुपए लगाए जा रहे हैं ताकि गंगा साफ रहे और आम आदमी को पीने के लिए साफ पानी मुहैय्या हो सके। इस हसीन ख्वाब के साथ- साथ राज्य में एक बदसूरत हकीकत ये भी है कि हरिद्वार जिले के लक्सर विकासखंड के निरंजपुर गांव में मौजूद सभी हैंड पंप्स से प्रदूषित पानी निकल रहा है।
जो पानी रंगहीन और गंधहीन माना जाता है वो पानी निरंजनपुर में बदबू से गंधा रहा है। पानी इतना गंदा है कि पीना तो छोडि़ए उसे हथेलियों में लेने से भी जी कतरा रहा है। बावजूद इसके बिडंबना देखिए, निरंजनपुर गांव के सरकारी स्कूल के मासूम बच्चों को ऐसे ही गंदे पानी को पीने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। क्योंकि उनके स्कूल में स्वजल परियोजना के तहत लगा पंप गंदा पानी ही दे रहा है।
राज्य के सिस्टम की सूरत देखिए पानी की सूरत से सहमें गांव वाले गंदे पानी की शिकायत स्वजल विभाग के अलावा शासन-प्रशासन से भी कर चुके हैं बावजूद इसके सरकारी स्कूल के गरीब परिवारों से ताल्लुक रखने वाले बच्चो की किसी ने परवाह नहीं की।
बच्चे गंदा पानी पी रहे हैं, उनके स्कूल का मिड-डे मील उसी पानी से बन रहा है। उसे खा कर मासूम बच्चे बीमार हो रहे हैं लेकिन मजाल क्या कि किसी का दिल पसीज जाए। ग्रामीण भारत के सरकारी स्कूल में160 बच्चें सरकारी लापरवाही का शिकार हो रहे हैं। बेहिचक उनकी जिंदगी से लगातार खेला जा रहा है।
मसला इतना संजीदा है बावजूद इसके शासन-प्रशासन की हरकत सरकारी है। जब इस मामले को लेकर खबर उत्तराखंड की टीम ने लक्सर  उपजिलाधिकारी कौस्तुभ मिश्रा से बात की तो वहीं रटा-रटाया जवाब मिला कि मामला संज्ञान में आया है जिसकी जांच कराई जाएगी।
ऐसे में सवाल उठता है, सूबे के जिन निजी स्कूलों में हाकिमों और हुक्मरानों के बच्चे पढ़ते हैं अगर उस स्कूल मेे एक दिन ऐसे पानी की सप्लाई हो तो क्या खास लोग बर्दाश्त कर पाएंगे? अगर नहीं तो सरकारी सिस्टम आम आदमी के बच्चों के लिए ऐसा निष्ठुर क्यों बना हुआ है!

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