दर्द से तड़पती रही गर्भवती महिला, न आई एंबुलेंस और न मिले डॉक्टर

चम्पावत : प्रति वर्ष करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद भी स्वास्थ्य विभाग की सुविधाएं हैं कि सुधरने का नाम नहीं ले रही है। मरीज दर्द से कराह रहा है और कई की मौत भी हो गई। अस्पताल में न तो दवाईयां हैं और न ही डॉक्टर व मशीनें और न ही एंबुलेंस है. नतीजतन गरीब मरीज बेमौत मारे जा रहे हैं।

दर्द से कराहती महिला नाली मं गिरी

कुछ ऐसा ही हुआ जिला अस्पताल चम्पावत में. सोमवार सुबह पाटी ब्लॉक के टॉक बलवाड़ी गांव निवासी दया कृष्ण की 20 वर्षीय गर्भवती पत्‍‌नी कमला मिश्रा के अचानक पेट में दर्द होने वाला।गर्भवती महिला का ऑपरेशन न कर पाने की स्थिति में डॉक्टर ने उसे रेफर कर दिया। एंबुलेंस को फोन किया तो वह नहीं आई। परिजन गर्भवती महिला को पैदल ही ले जाने लगे। महिला का दर्द बढ़ा तो वह नाली में गिर गई। मगर अस्पताल प्रबंधन ने उसे उठाना गवारा न समझा। महिला काफी देर तक दर्द से तड़पती रही। जब बात मीडिया में फैली तो अस्पताल प्रबंधन ने महिला को फिर से अस्पताल में भर्ती किया और प्राथमिक उपचार किया।

पाटी में उपचार न होने पर वह उसे लोहाघाट ले आए। जहां डॉक्टर ने वहां से रेफर कर जिला अस्पताल भेज दिया। कमला के साथ उसकी बूढी सास थी। सास कमला को लेकर चम्पावत फुलारगांव में रिश्तेदारी में ले आई। रात्रि में अचानक दर्द बढ़ने पर वह उसे जिला अस्पताल ले आए। करीब पौने 12 बजे अस्पताल प्रबंधन ने उसे भर्ती कर लिया। मगर कोई उपचार नहीं किया। न ही कोई दवा दी और न ही इंजेक्शन। कमला की हालत बिगड़ती जा रही थी। मंगलवार सुबह डॉक्टर संगीता त्रिपाठी ने डिलीवरी न कर पाने की स्थिति में उसे रेफर कर दिया। और कागज बनाकर उसे ले जाने को कहा। अकेली बूढ़ी सास अब करती भी क्या। उसने 108 एंबुलेंस को फोन किया लेकिन वह नहीं आई।

फिर अस्पताल नर्स ने 108 एंबुलेंस से बात की। एंबुलेंस फिर भी नहीं आई। फिर सास ने रिश्तेदारी में फोन कर वाहन लाने को कहा। वाहन न आने पर सासा अपनी बहू को पैदल ही अस्पताल से बाहर ले आई। जहां कमला का दर्द और बढ़ गया और वह नाली में गिर गई। अस्पताल कर्मचारी भी महिला को देख रहे हैं लेकिन किसी ने भी उसे उठाने की जहमत नहीं उठाई।

अस्पताल में नहीं ओटी

डॉ. संगीता ने बताया कि अस्पताल में ऑपरेशन थियेटर नहीं है। स्त्री प्रसूति विशेषज्ञ भी नहीं है। बच्चा भी ऊपर था। यूट्रस का मुंह नहीं खुला था। ऐसे में डिलीवरी करने में जच्चा बच्चा को खतरा हो सकता था। इसलिए उन्हें हायर सेंटर रेफर किया।

मरीज के लिए नहीं सीएमएस के लिए है एंबुलेंस

मरीज को अस्पताल प्रशासन रेफर तो कर देता है लेकिन एंबुलेंस की व्यवस्था नहीं करता। 108 एंबुलेंस भी समय से नहीं आई। अस्पताल में खुशियों की सवारी व जिला अस्पताल की एंबुलेंस मौजूद थी लेकिन दोनों ही एंबुलेंस नहीं दी गई।

वहीं जिला अस्पताल सीएमएस डॉ. आरके जोशी का कहना है कि उपचार न कर पाने की स्थिति में डॉक्टर ने उसे रेफर किया था। परिजन से वाहन आने के उपरांत ले जाने को कहा लेकिन परिजनों ने वाहन का इंतजार नहीं किया और स्टॉफ को बताए बगैर वह मरीज को नीचे ले आए। ओटी न होने की वजह से उपचार में दिक्कत होती। अस्पताल की एंबुलेंस का किराया निर्धारित है। जो किराया देता है वो ले जाता है। खुशियों की सवारी व 108 एंबुलेंस पर हमारा कोई कंट्रोल नहीं है।

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