जिनेथ गांव के ग्रामीणों की व्यथा,राज्य बनने से पहले की मांग पर आज तक नहीं हुआ अमल

उत्तरकाशी, (सुनील कुमार)- ये कैसा लोकतंत्र है जहां जनता की बुनियादी सहूलियत पर 20 साल बाद भी गौर नहीं होता। सत्रह साल राज्य बने हो गए जबकि विकासखंड डुंडा के जिनेथ गांव के लिए सड़क की मांग राज्य बनने से भी तीन साल पहले की है। बंदरसयुं पट्टी के जिनेथ गांव जाने के लिए आज भी ग्रामीणों को पैदल सफर करना पड़ता है।
सबसे ज्यादा तकलीफ तो तब होती है जब गांव में किसी बीमार को या किसी प्रसूता को अस्पताल ले जाना पड़ता है। जिलाधिकारी कार्यालय में गांव की पीड़ा और सड़क की मांग करते ग्रामीणों की व्यथा सुनो तो कलेजा मुंह को आ जाता है।
ग्रामीण तंज कसते हुए कहते हैं कि उन्होंने सुना है कि इस देश में गांवों को सड़क से जोड़ने के लिए प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना भी है लेकिन उनके गांव तक सड़क कब पहुंचेगी कहना मुश्किल है। दरअसल गांव वालों का कहना है कि वे सड़क की मांग के लिए हर जिम्मेदार की दहलीज पर अपनी फरियाद कर चुके हैं बावजूद इसके आज तक जिनेथ तक सड़क नहीं पहुंची।
हालांकि गांव वाले कहते हैं कि साल 2015-16 में हरिती से जिनेथ तक पटारा-स्यालना मोटर मार्ग की स्वीकृति हुई थी लेकिन जमीन पर अभी तक काम शुरू नहीं हुआ। जबकि सड़क बन जाती तो जिनेथ, लोरियाण,बदली ऊपरी, बदली निचरी,मुंडल धार और पेंथर जैसे गांवों की जनता को आवागमन की सहूलियत मिल जाती।

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