आप चाहे कितने भी पत्थर दिल क्यों न हों, ये खबर आपको भीतर तक हिला देगी

हरिद्वार- सत्ता बदली लेकिन सूबे के हालात नहीं बदले। अच्छे दिन का वादा हुआ लेकिन अच्छे दिन आए नहीं। सर्जिकल स्ट्राइक हुई लेकिन ये सर्जिकल स्ट्राइक न तो निजी स्कूलों के खिलाफ हुई और न निजी अस्पतालों के खिलाफ । नतीजतन आज भी निजी अस्पताल के खौफनाक महंगे बिल, भुगतान में असमर्थ लोगों को खुदकुशी करने के लिए मजबूर कर रहे हैं।

ताजा मामला हरिद्वार के ज्वालापुर इलाके का है जहां नवजात बेटी और पत्नी को अस्पताल से डिस्चार्ज कराने के लिए बिल के पैसों का इंतजाम न होने पर एक उत्तराखंड के युवा मनीष जोशी ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली।

बताया जा रहा है कि वह हरिद्वार जिले में सिडकुल की एक फैक्ट्री में काम करता था। पगार मामूली थी। लेकिन गर्भवती पत्नी की डिलीवरी करवाने के लिए निजी अस्पताल ने अपना बिल 50 हजार रूपए का बना दिया था। जिसे चुकाना मनीष के बूते की बाहर की बात थी।

रानीपुर कोतवाली क्षेत्र की रामधाम कॉलोनी में बीते डेढ़ साल से मनीष जोशी पुत्र भुवनेश्वर जोशी निवासी सुंदराखाल पौड़ी गढ़वाल अपनी पत्नी रश्मि के साथ रह रहा था। पांच दिन पूर्व उसने अपनी गर्भवती पत्नी रश्मि को ज्वालापुर कोतवाली क्षेत्रांतर्गत एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया था।

शुक्रवार को बड़े ऑपरेशन के बाद रश्मि ने एक बच्ची को जन्म दिया था। अस्पताल का बिल 50 हजार रुपये बना था, लेकिन मनीष के पास इतने पैसे नहीं थे। मनीष ने अपने रिश्तेदारों से भी मदद मांगी। सभी ने उसे पैसों का इंतजाम करने का भरोसा दिलाया था। सोमवार को उसे पत्नी रश्मि को अस्पताल से डिस्जार्ज कराना था। सुबह से ही मनीष पैसों के इंतजाम में जुटा हुआ था, लेकिन दोपहर तक पैसे नहीं मिल पाए। इसी परेशानी में मनीष ने घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली।

उधर, मनीष के इस कदम से बेखबर उसके रिश्तेदार उसकी पत्नी और बच्ची को अस्पताल से डिस्चार्ज कराकर घर पहुंचे तो उन्हें मनीष पंखे से लटका मिला। कोतवाली प्रभारी ऐश्वर्या पाल ने बताया कि पूछताछ में सामने आया है कि पैसा न होने की वजह से मनीष परेशान था और इसीलिए उसने आत्महत्या कर ली। उधर जीजा विनोद बहुखंडी ने बताया कि मनीष पैसों का इंतजाम न होने के कारण परेशान था और इसी कारण उसने जान दे दी।

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