केदारपुरी निर्माण में पैसों का नहीं संकट, फिर भी अधिकारियों के माथे पर उभरी शिकन की लकीरें

बाबा केदार के धाम को पुनर्निर्माण के जरिए सजाने-संवारने के लिए पीएम मोदी ने धन की कमी न होने देने का वादा किया है। बावजूद इसके नई केदारपुरी के निर्माण को लेकर उत्तराखंड के अधिकारी और कार्यदायी संस्था के माथे पर चिंता की लकीरें खिंची हुई हैं।

दरअसल केदारधाम के पुनर्निर्माण में बेशक धन की कमी न आए लेकिन खबर है कि केदारपुरी में पत्थरों का अकाल पड़ गया है। पत्थरों के संकट से बचने के लिए अधिकारी भी सोच में पड़े हुए हैं।

जी हां,केदारपुरी को संवारने में जिस खास पत्थर की दरकार है वो केदारनाथ में नहीं मिल पा रहे हैं। जबकि जो पत्थर पहले से ही वहां थे वे सब इस्तमाल में लाए जा चुके हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआइ) विभाग के अधीक्षण पुरातत्वविद् लिली धस्माना का कहना है कि वहां फर्श बनाने के लिए पत्थर नहीं है। इस बारे में संस्कृति मंत्रालय को रिपोर्ट भेज जा रही हैं।

धस्माना का कहना है कि, मंदिर का करीब 600 वर्गमीटर भाग पर पत्थर लगाए जाने हैं। एक पत्थर का आकार करीब डेढ़ वर्गफीट है। इस तरह 2000 से अधिक पत्थरों की जरूरत है।

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