गर्मियों के मौसम में भेड़-बकरी पालक केदारनाथ क्षेत्र में दिखने भी नहीं चाहिए – मुख्य सचिव

केदारनाथ – इस गरमी में रुद्रप्रयाग जिले के भेड़ पालको समेत दूसरे भेड पालक भी केदारनाथ क्षेत्र में अपनी भेड़-बकरियों को चुगाने के लिए नहीं लाएंगे। राज्य के मुख्य सचिव ने भेड़-बकरी पालकों को क्षेत्र में आने से रोकने के लिए जंगलात महकमें को सख्त निर्देश दिए हैं।
दरअसल राज्य के मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह ने आज (मंगलवार) को केदारनाथ धाम में चल रहे पुनर्निर्माण कार्यों का जायजा लिया। उन्होंने धाम चल रहे विभिन्न कार्यों का स्थलीय निरीक्षण किया और अधिकारियों को आवश्यक दिशा निर्देश दिये।
मुख्य सचिव ने कहा कि आगामी यात्रा को सुगम और सुरक्षित बनाने के साथ ही धाम में देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर से बेहतर सुविधाएं प्रदान करना सरकार की प्राथमिकता है। सभी व्यवस्थाएं यात्रा शुरू होने से पूर्व चाक चैबंद हो जानी चाहिए।
मुख्य सचिव सिंह ने शौचालय निर्माण का भुगतान अब इस्तेमाल करने वालों के फीडबैक के आधार पर करने के निर्देश दिए। मौसम खराब होने के चलते सरस्वती घाट पर निम द्वारा कार्य बंद किया गया था, जिसके पुनः शुरू करने के निर्देश दिए। एमआई-26 हेलीपैड से सरस्वती घाट तक के रास्ते पर लोनिवि को लेबर बढ़ाकर कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिए। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि सरस्वती घाट पर निर्मित चबूतरे के चारों ओर मलबा हटाकर सौंदर्यीकरण करने के भी निर्देश दिए।
मुख्य सचिव ने विद्युत विभाग को निर्देशित किया कि एक सप्ताह के भीतर मंदिर के समीप लगे विद्युत पोल हटा दें। अंडर ग्राउंड केबल बिछाने का कार्य जल्द पूरा करें। वहीं मुख्य सचिव ने केदारनाथ मंदिर गेट से और सर्किल प्वाइंट तक बन रहे पैदल मार्ग के दोनों ओर सुरक्षा दीवार लगाने के निर्देश दिये।
जबकि मंदिर समिति को निर्देशित किया कि मंदिर से घाट तक पैदल मार्ग व चबूतरों के साथ ही भवनों को और खूबसूरत बनाया जाए ताकि यात्रा के दौरान वीआईपी मूवमेंट में यह आकर्षित लगे। तीर्थ पुरोहित दिनेश पोस्ती और हरीश पोस्ती के मकानों को नाली निर्माण हेतु जरूरत के अनुसार तोडने के लिए कहा गया। उध्धव कुण्ड के सौदर्यीकरण के भी निर्देश लोनिवि को दिए।
कार्यदायी संस्था को निर्देश दिया कि मंदिर के बांयी ओर 100 मीटर दूरी पर स्थित गुफा को शौचालय, विद्युत, पानी की सुविधा से जोडा जाय, ताकि यात्रा के दौरान श्रद्धालु आराम से बैठकर मेडिटेशन कर सके। एएसआई को निर्देश दिए कि यात्रा से पूर्व मंदिर के सामने स्थित चबूतरे पर पत्थर लगाकर पूरी तरह सौंदर्यीकरण करें। निम को निर्देशित किया कि मंदिर के पीछे सौंदर्यीकरण कार्य जल्द से जल्द पूरा किया जाय।
 बहरहाल मुख्य सचिव के जंगलात महकमें को दिए आदेश से तय हो गया है कि सरकार बेशक पशुपालकों के हितों की बात करे लेकिन केंद्र की नजर में नंबर बढ़ाने के लिए भेड़-बकरी पालकों पर जंगल में आने की बंदिश भी लगा सकती है जबकि ये काम राज्य में जमानों से होता आया है और भेड़-बकरी पालन राज्य की रीढ़ रहा है। ऐसे में माना जा रहा है कि यात्रा सीजन के दौरान भेड़ बकरिया केदारनाथ क्षेत्र में चारा नहीं चुग पाएंगी और सर्दियों में बर्फ पड़ जाएगी।

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