बजट के आभाव में दीन-हीन बना प.दीनदयाल उपाध्याय राजकीय चिकित्सालय देहरादून

 देहरादून-  सूबे में डबल इंजन का दौर है, आए दिन सुनाई दे रहा है कि जन हित में बजट की कोई कमी नहीं होने दी जाएगी। बावजूद इसके सरकारी अस्पताल कंगाली के दौर से गुजर रहे हैं। जबकि काबिले गौर बात ये है कि राज्य में सेहत के महकमें की निगरानी खुद मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत कर रहे हैं।
फिर भी देहरादून के पंडित दीनदयाल उपाध्याय राजकीय चिकत्सालय (कोरनेशन) अस्पताल की माली हालत तंगहाली से गुजर रही है। अस्पताल को पिछले एक साल से कोई बजट जारी नहीं हुआ है। जिसकी वजह से न तो अस्पताल मे दवा है न जरूरी उपकरण। जुगाड़ से काम चलाया जा रहा है।
ललित मोहन पुनेठा,सीएमएस(प. दीनदयाल उपाध्याय, चिकित्सालय देहरादून)

अस्पताल के सीएमएस ललित मोहन पुनेठा की माने तो बजट ना होने के चलते अस्पताल में दवा की सप्लाई पर असर पड़ रहा है। कई  दवा कम्पनियों का भुगतान नहीं हो पा रहा है ऐसे में अब दवा कंपनियों दवा आपूर्ति करने में आनाकानी करने लगी हैं। ऐसे में मरीजों को जहां भारी दिक्कतों का सामना करना पड रहा है वहीं डॉक्टर्स के साथ-साथ दूसरे मुलाजिमों को तिमारदारों की खरी-खोटी सुनने को मजबूर होना पड़ रहा है।

अस्पताल के सीएमएस डॉ. पुनेठा कहते हैं अस्पताल को कई दवा और उपकरणों की दरकार है लेकिन अस्पताल प्रशासन लाचार है। अस्पताल की इस दिक्कत का जिक्र वें कई बार विभाग से खत के जरिए कर चुके हैं वावजूद इसके हालात नहीं बदले। ऐसे में सवाल उठता है कि अगर राज्य में हालात ठीक हैं तो फिर सरकारी अस्पताल कंगाल क्यों हैं।
हमे ये नहीं भूलना चाहिए कि भुगतान में लेटलतीफी के चलते मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना से कंपनी ने हाथ खींचा और उसके हाथ खींचते ही निजी अस्पताल में एक शख्स की मौत हो गई और सैकड़ों मरीजों की फजीहत हुई थी। उधर उत्तरप्रदेश के गोरखपुर में बजट की कमी से ऑक्सीजन सिलेंडरों की आपूर्ति समय पर नहीं हो पाई और कई मासूम बच्चों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी।
 इन हृदयविदारक घटनाओं को हुए अभी ज्यादा वक्त नहीं हुआ है। लेकिन उत्तराखंड के सरकारी अस्पताल में बजट का टोटा है जिसका असर उस जनता पर पड़ रहा है जिसने डबल इंजन दिया है।

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