हल्द्वानी : मेडिकल स्टोरों पर छापेमारी, न मिला दवाओं का नाम, न एक्सपायरी डेट

हल्द्वानी-वनभूलपुरा थाना पुलिस और औषधि नियंत्रण विभाग ने लाइन नंबर-17 के मेडिकल स्टोरों पर छापेमारी के दौरान खामियां मिलने पर इनके क्रय-विक्रय पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी। दो अन्य मेडिकल स्टोरों पर कुछ चिह्नित दवाओं की खरीद-बिक्री को बैन किया गया है। सभी स्टोर संचालकों से एक सप्ताह में स्पष्टीकरण मांगा गया है।

स्पष्टीकरण न मिलने पर स्टोर सील करने या लाइसेंस निरस्तीकरण

स्पष्टीकरण न मिलने पर स्टोर सील करने या लाइसेंस निरस्तीकरण हो सकता है। कार्रवाई में औषधि अनुज्ञापन प्राधिकारी (डीएलए) कुमाऊं मंडल हेमंत सिंह नेगी, ड्रग इंस्पेक्टर मीनाक्षी बिष्ट, सीओ डीसी ढौंडियाल, एसओ वनभूलपुरा दिनेश महंत, एसआई मनोज यादव आदि रहे।

दवा दुकानों पर मिलीं ये अव्यवस्थाएं, न नाम मिला, न एक्सपायरी डेट

छापेमारी के दौरान टीम को एक मेडिकल स्टोर में कई ऐसी दवाएं मिलीं, जिनका न नाम था, न एक्सपायरी डेट। टीम ने ऐसी सभी दवाएं नष्ट करवा दीं। संचालकों को ये दवाएं न बेचने की हिदायत दी।

नींद की दवाओं की बिक्री का हिसाब नहीं

दुकानों पर आइसोटॉपिक यानी ऐसी दवाएं, डॉक्टर की सलाह पर ही तनाव घटाने या नींद लाने के लिए प्रयोग होती हैं, उनकी बिक्री और रख-रखाव का कोई हिसाब न था।

जेनेरिक दवाओं का अलग काउंटर नहीं

औषधि नियंत्रण विभाग के नए नियमों के मुताबिक दवा दुकानों पर जेनेरिक दवाओं के लिए अलग काउंटर जरूरी है। मगर अधिकांश दुकानों पर ये दवाएं आम दवाओं के साथ ही बेची जा रही थीं।

मनमानी कीमत पर बिक रही थीं दवाएं

टीम ने निरीक्षण के दौरान दवा दुकानों पर पंजीकरण रजिस्टर चेक किए तो कई दवाओं की बिक्री का हिसाब नहीं मिला। टीम के मुताबिक कई दवाएं मनमाने दाम पर बेचने के मामले भी सामने आए।

ये दिए गए निर्देश

1.डॉक्टरों के पर्चे पर ही दें तनाव घटाने की दवाएं

2.ट्रामाटॉल दवा भी बिना डॉक्टरी परामर्श न बेचें।

3.गर्भपात-टीबी संबंधी दवाओं की बिक्री दर्ज करें

4.इन्हें खरीदने वाले का नाम, नंबर भी दर्ज करना होगा।

5.एनडीपीएस दवाएं पर्चे पर ही बेचें और पूरा ब्यौरा रखें।

6.जेनेरिक दवाओं का अलग काउंटर, डिस्प्ले बोर्ड बनाएं।

हल्द्वानी की ड्रग इंस्पेक्टर मीनाक्षी बिष्ट का कहना है कि कई दवाओं के रखरखाव, क्रय-विक्रय में अनियमितताएं मिली है। दवाओं के दुरुपयोग आदि अनियमितताओं पर मेडिकल स्टोर संचालकों से सात दिन में स्पष्टीकरण मांगा गया है।

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