शिक्षा मंत्री जी लगे विभाग को कोसने, ‘नाच न जाने आंगन टेड़ा’…आप भी पढ़िए

हल्द्वानी: शिक्षा मंत्री अरविंद पांडेय ने दो दिन पहले देहरादून के जीआइसी थानो में निरीक्षण के बाद हुए विवाद पर स्पष्ट किया कि अगर शिक्षिका से अभद्रता की होगी तो मैं इस्तीफा दे दूंगा। वैसे भी मुझे बिगड़े हालात वाले विभाग का मंत्री बनाया गया है। शिक्षा मंत्री रहूं या नहीं, मैं अभावों से आया हूं और शिक्षा विभाग को सुधारने के लिए लगातार प्रयास करता रहूंगा।

कठघरिया में बुधवार को एकल अभियान के संस्कार शिक्षा पर आयोजित प्रशिक्षण वर्ग के समापन पर पहुंचे शिक्षा मंत्री ने पत्रकारों से वार्ता में बताया कि विद्यालय में निरीक्षण दौरान जब मैंने प्रधानाचार्य से कुंजी से पढ़ाने के बारे में पूछा तो उन्होंने भी इसे गलत बताया। इस पर मैंने प्रधानाचार्य से दो टूक कहा कि अगर इस तरह के अध्यापन की पुनरावृत्ति होगी तो शिक्षिका के साथ ही आप पर भी कड़ी कार्रवाई होगी।

पांडे ने कहा, दुर्भाग्य था कि वहां पर किसी के पास पाठ्य पुस्तक उपलब्ध नहीं थी। वैसे भी किसी से अभद्रता करना मेरे स्वभाव में नहीं है। शिक्षक खीझ मिटाने के लिए धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं और करते रहें। एक और बात है, व्यवस्था में सुधार के लिए अपने मन मुताबिक अधिकारियों की तैनाती भी करते रहूंगा। उन्होंने कहा कि वैसे भी मैंने और अधिकारियों ने स्कूल में शिक्षकों की उपस्थिति तो जांची ही नहीं।

करीब चार महीने पहले उच्च न्यायालय ने सभी स्कूलों में मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने के सख्त निर्देश दिए थे। अभी तक कुछ नहीं होने के सवाल पर शिक्षा मंत्री बोले, शिक्षकों की कमी की सीधी जिम्मेदारी मेरी है, लेकिन उच्च न्यायालय में अतिथि शिक्षकों का मामला विचाराधीन है। जल्द ही सुनवाई होनी है। मेरा दावा है कि तीन महीने में सभी स्कूलों में फर्नीचर उपलब्ध हो जाएगा। व्यवस्थाओं को दुरुस्त किया जाएगा।

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