शिक्षा मंत्री और शिक्षा विभाग के आला अधिकारियों ने तोड़ा अपना बनाया हुआ नियम

देहरादून(मनीष डंगवाल)- क्या उत्तराखंड के नेताओं और अधिकारियों को अपने बनाए हुए ही नियम याद नहीं रहते हैं। जी शिक्षा मंत्री और शिक्षा विभाग के आला अधिकारियों को अपना बनाया हुआ ही नियम याद नहीं रहा वो भी तक जब नियम पहली बार लागू होना था।

विद्यालयी शिक्षा विभाग की बैठक में नहीं होगा प्लास्टिक की बोलत में पानी प्रयोग

जी हां 25 मई को शिक्षा विभाग की बैठक में शिक्षा मंत्री के साथ शिक्षा विभाग के आला अधिकारियों ने सर्व सम्मति से नियम बनाते हुए ये तय किया था कि आज से जो भी विद्यालयी शिक्षा विभाग की बैठक होगी उसमें प्लास्टिक की पानी की बोतलों का उपयोग नहीं किया जाएगा। लेकिन जब आज सचिवालय में शिक्षा मंत्री अरविंद पाण्डेय ने शिक्षा विभाग में फर्जी प्रमाण पत्रों के आधार पर नियुक्ति पाए शिक्षकों के खिलाफ समीक्षा बैठक की तो उसमें शिक्षा विभाग के सभी अधिकारियों के सामने प्लास्टिक की पानी की बोतले नजर आई.

जब नहीं करना था इस नियम का पालन तो फिर क्यों बनाया ये नियम 

जिससे ये सवाल उठ रहे है कि जब शिक्षा विभाग और शिक्षा मंत्री को इस नियम का पालन करना ही नहीं था तो फिर ये नियम बनाया क्यों गया। आपको बतादे कि शिक्षा विभाग की बैठक के लिए जो नियम बनाया गया है,उसमें किसी भी तरह से प्लास्टिक की पानी की बोतल का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा यानी बैठक के लिए प्लास्टिक की पानी बोतल मंगाई ही नही जाएगी। एसे में आप सोच रहे होंगे कि अगर बैठक के दौरान किसी को प्यास लग जाएं तो क्या वह पूरी बैठक में प्यासा ही बैठा रहेगा तो आप थोड़ा सा गलत सोच रहे है। क्योंकि विभगा ने प्लास्टिक की पानी की बोतल पर रोक साथ सभी अधिकारियों को निर्देश दिए है कि जब भी कोई बैठक हो वह उसमें अपने घर से मेटल की बोतल में पानी लेकर आएं।

अपर निदेशक माध्यमिक शिक्षा ने किया पालन

शिक्षा विभाग में बनाए गए निर्णय का पालन मात्र एक अधिकारी ने किया। जीं हां बैठक में माध्यमिक शिक्षा की अपर निदेशक वंदना गबरीयाल ही मेटल में पानी लेकर आई थी. जिस पर शिक्षा मंत्री ने उनकी सरहाना की वहीं जो अधिकारी पानी साथ नहीं ले आए थे उन सभी अधिकारियों से शिक्षा मंत्री ने नाराजगी जाहिर की।

पहल तो अच्छी है लेकिन ऐसी पहल का फायदा क्या

कुल मिलाकर शिक्षा विभाग ने जो पहल की है वह काबिले तारिफ तो है लेकिन सवाल तो यहीं उठ रहा है कि ऐसी पहल का करना भी क्या जो पहल अपनाई ही न जाए। लेकिन आगे की बैठकों में देखने वाली बात ये होगी क्या सभी अधिकारी पानी की बोतल स्वंय घर से लेकर आते हैं या शिक्षा विभाग की बैठकों में पानी प्लास्टिक की पानी की बोतल की इस्तेमाल किया जाता है।

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