न काम में गुणवत्ता का ख्याल, न श्रम कानून का मलाल!

टिहरी (हर्षमणी उनियाल) – घनसाली विधानसभा क्षेत्र की सेंदुल पट्टी के सरांसगांव इलाके में बाल गंगा के ऊपर बने पुल पर मरम्मत का काम चल रहा है।
लेकिन जिस अंदाज में काम हो रहा है उससे महसूस हो रहा है कि हर मामले में गुणवत्ता से खिलवाड़ किया जा रहा है।
फिर चाहे वह निर्माण समाग्री का मामला हो या फिर काम कर रहे मजदूरों की हिफाजत का सवाल। हर चीज की अनदेखी देखने को मिल रही है।

बताया जा रहा है कि  लोकनिर्माण विभाग पुल के किनारों पर बने पिल्लरों के टूटे हुए जोड़ों की मरम्मत करवा रहा है। लेकिन काम का जो सलीका है उसे देखा जाए तो सिर्फ बाहर से पलस्तर हो रहा है। पुल के पिल्लर का टूटा पलस्तर से छिपा दिया गया है। काम की गुणवत्ता और तकनीक पर निगरानी करने वाला कोई नहीं है।
वहीं काम कर रहे मजदूरों की हिफाजत की बात की जाए तो कहीं से भी नहीं लगता कि इस राज्य में किसी श्रम कानून का भी पालन होता होगा। न मजदूर के सिर पर हेलमेट है न उसका कोई बीमा बेचारा मजदूर नदी के ऊपर तीस चालीस फीट पर जान हथेली पर रखकर काम कर रहा है। इसे  साहस कहें या दुस्साहस या फिर मजदूर की मजबूरी।
बहरहाल सरांसगांव के इस निर्माण को देखकर साफ दिखाई दे रहा है कि सूबे के दूर-दराज इलाकों का भगवान ही रखवाला है। यहां श्रम कानूनों के कोई माएने नहीं हैं, मजदूरों की मजबूरी का ठेकेदार और महकमें दोनों फायदा उठा रहे हैं। श्रम कानूनों का जमकर उलंघन हो रहा है। ऐसे में सवाल उठता है कि खुदा न करे कुछ अनहोनी हो जाए तो उसका जिम्मेदार होगा?

 

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