उत्तराखंड: सजा हो तो ऐेसी हो वरना न ही हो, शिक्षा मंत्री के निर्देश के बाद सख्त कार्रवाई

देहरादून- एसआईटी जांच में सहयोग न करने वाले हरिद्धार जिले के बादरबाद बीईओ आॅफिस में तैनात बाबू प्रमोद कुमार और मनोज कुमार पर शिक्षा विभाग ने शिक्षा मंत्री के निर्देश पर देर शाम होते होते कार्रवाई कर ही दी.

ऐसा शिक्षा मंत्री बनने के बाद पहली बार हुआ है. जब जिस दिन शिक्षा मंत्री ने कार्रवाई करने के निर्देश दिए हो और विभाग ने उसी दिन कार्रवाई की हो. यहां तक सीएम जनता दरबार में हंगामा करने वाली महिला शिक्षिका को संस्पेड करने के सीएम के निर्देश पर भी शिक्षा विभाग ने उसी दिन कार्रवाई नहीं की। ऐेसे में कहा जा सकता है कि शिक्षा मंत्री के इस बार के निर्देेश को शिक्षा विभाग ने हाथों हाथ लिया।

मनोज कुमार का भेजा गया पिथैरागढ़

एसआईटी जांच में सहयोग न करने पर बाबू मनोज पर गाज़ गिरी. शिक्षा मंत्री ने नाराज होकर मनोज कुमार का ट्रांसफर करने के निर्देश दिए औऱ उन्हें पिथौरागढ़ जिले के दुर्गम स्कूल राजकीय इंटर काॅलेज पांगू भेज दिया।

प्रमोद कुमार को भेजा गया चमोली

एसआईटी जांच में सहयोग न करने की शिकायत को शिक्षा मंत्री ने गंभीरता से लिया. वहीं जहां मनोज कुमार को शिक्षा मंत्री के निर्देश पर पिथौरागढ़ भेजा गया है वहीं प्रमोद कुमार चौहन को भी जांच में सहयोग न करने पर उन्हे भी चमोली के दुर्गम स्कूल राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय तोर्ती, देवाल में भेजा गया है।

कुल मिलाकर एसआईटी जांच में सहयोग न करने को शिक्षा मंत्री ने इस लापरवाही बताई और इसकी सजा दोनों कर्मचारियों दुर्गम में भेज कर चुकानी पड़ी.

लेकिन देखना ये होगा शिक्षा विभाग में अगर इसी तरह की लापरवाही पर सजा मिलनी शुरू हो गई है तो क्या आगे भी इस तरह की कार्रवाइयां शिक्षा मंत्री की ओर से लापरवाह कर्मचारियों पर देखने को मिलेगी।

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