सेना में भर्ती होने के लिए युवा ले रहे खतरनाक इंजेक्शन व दवाइयां, तस्वीर दे रही गवाही

हर कोई चाहता है कि उसकी सरकारी नौकरी हो औऱ कभी-कभी इसी चाह को दिल में लिए युवा ऐसा कदम उठा लेते हैं जो उनकी जिदंगी को बर्बाद कर के रख देतीहै. कोई फर्जी प्रमाण बनाता है तो कोई शरीर से खिलवाड़ करता है.

जी हां सेना भर्ती रैली में हिस्सा ले रहे युवा दौड़ में पास होने के लिए सेहत के लिए खतरनाक इंजेक्शन ले रहे हैं। साथ ही शारीरिक क्षमता बढ़ाने वाली दवाओं का सेवन कर रहे हैं। इस बात की गवाही कमला नेहरूनगर में स्थित भर्ती स्थल पर पड़े प्रतिबंधित इंजेक्शन और दवाइयां ने दी।

अभ्यर्थी स्टेरॉयड के इंजेक्शन जूते या मोजे में छुपाकर युवा इन दवाओं को ग्राउंड के अंदर ले आते हैं। जब दौड़ शुरू होने का समय आता है, तब वे चोरी से इंजेक्शन लगा लेते हैं। दौड़ के बाद खाली मैदान में ढेरों इंजेक्शन, सिरिंज और दवाओं की शीशी मिल रही हैं। सेना की भर्ती रैली अंतिम दौर में है।

शेड्यूल के मुताबिक सोमवार को गाजियाबाद जनपद की भर्ती हुई। तड़के ढाई बजे अभ्यर्थियों की लंबाई का मापन हुआ। इसके बाद शैक्षिक व मूल निवास प्रमाणपत्र चेक किए गए। भर्ती डायरेक्टर कर्नल रजनीश मेहता ने बताया कि अभ्यर्थियों का बैग चेक होता है, इसके बाद भी वे छिपाकर इंजेक्शन व स्टेरॉयड लेकर आ जाते हैं।

दौड़ लगाने से पहले जब उन्हें ग्राउंड में बैठाया जाता है, तभी वह इंजेक्शन लगा लेते हैं। इन दवाओं का उनके शरीर पर साइड इफेक्ट पड़ता है। अगर कोई पहली बार स्टेरॉयड का इंजेक्शन लगाकर धूप में दौड़ता है, तो उसे हार्ट स्ट्रोक का खतरा बना रहता है। सोमवार को गाजियाबाद की भर्ती थी, जिसमें 51 फर्जी कागजात वाले अभ्यर्थी पकड़े गए। इन सभी को रैली से निकाल दिया गया। मंगलवार को भी गाजियाबाद जनपद की भर्ती होगी।

कैसे होता है शरीर को नुकसान

फिजिशियन डॉ. अंशुल वार्ष्णेय का कहना है कि अगर कोई युवा स्टेरॉयड के इंजेक्शन काफी समय से ले रहा है, तो उसकी बॉडी की रोग प्रतिरोधक क्षमता खत्म होने लगती है, हड्डियां कमजोर हो जाती हैं। आंखों में मोतियाबिंद की शिकायत, ब्लड शुगर बढ़ना, वजन कम होना शुरू हो जाता है। हड्डियां कमजोर होने से जरा सी चोट लगने पर फ्रैक्चर हो जाता है। खिलाड़ी या बॉडी बनाने के इच्छुक व्यक्ति एनाबोलिक स्टेरॉयड लेते हैं, जिससे उनकी सेहत पर बुरा प्रभाव पड़ता है।

नहीं हो पाती स्टेरॉयड की जांच

सेना भर्ती में जो मेडिकल किया जाता है, उसमें स्टेरॉयड की जांच ही नहीं हो पाती है। क्योंकि इसकी जांच की प्रक्रिया जटिल है। ऐसे में बहुत से अभ्यर्थी स्टेरॉयड लेकर दौड़ पूरी कर लेते हैं और पकड़ में भी नहीं आते।

309 अभ्यर्थियों ने की दौड़ पास सोमवार को गाजियाबाद जनपद के 5939 अभ्यर्थी रजिस्टर्ड थे, जिनमें से 3231 अभ्यर्थी ही कमला नेहरू नगर ग्राउंड पहुंचे। लंबाई मापन के बाद 2983 अभ्यर्थियों ने दौड़ लगाई, इसमें 309 ही पास हो सके।

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