एशिया की पहली ऑल विमिन टीम जिन्होंने 8 महीने में समुद्र के रास्ते मापी पूरी दुनिया

नई दिल्ली- एक नाव पर सवार होकर समुद्र के रास्ते दुनिया की सैर पर निकलीं भारतीय नौसेना की 6 महिला अधिकारी 19 मई तक गोवा पहुंच रही हैं। 8 महीनों में दुनिया का चक्कर लगा लौटने वाली यह टीम एशिया की पहली ऑल विमिन टीम है, जो समुद्र के रास्ते दुनिया मापने (सरकम नेविगेशन) निकली है। पिछले साल 10 सितंबर को आईएनएसवी तारिणी पर ‘नाविका सागर परिक्रमा’ के नाम से गोवा से शुरु हुआ यह सफर गोवा में ही आकर पूरा होगा।

जब लगा तूफान ले गया बहा के

इस अभियान का नेतृत्व कर रही लेफ्टिनेंट कमांडर वर्तिका जोशी सहित बाकी क्रू मेंबर्स ने एनबीटी से सफर के अनुभव साझा किए। वर्तिका ने बताया कि हम हर वक्त काफी सतर्क रहते हैं। समंदर कभी लापरवाही को माफ नहीं करता और अगर सचेत नहीं हैं तो जान पर बन सकती हैं। सफर के दौरान एक बार हमारा सामना भयानक तूफान से हुआ और एक बहुत बड़ी लहर बोट को क्रैश करती हुई मेरे ऊपर से गुजरी।

डर और चौकसी के बीच होती है बारीक लाइन

अगर लाइफ जैकेट पहनने और तैयारी को लेकर जरा भी लापरवाही हुई होती तो लहर इतनी तेज थी कि वह हम सबको और बोट को बहा ले जाती। वर्तिका कहती हैं कि इससे मेरा भरोसा मजबूत हुआ कि डर और चौकसी के बीच बहुत बारीक लाइन होती है और यह भी कि समंदर को कभी हल्के में नहीं लेना चाहिए। लेफ्टिनेंट ऐश्वर्या ने कहा कि इस सफर का सबसे बड़ा सबक यह है कि चौकसी में कभी कोई कमी नहीं आनी चाहिए क्योंकि कभी भी कहीं भी ऐसा हो सकता है, जो आपने सोचा ही ना हो।

एक कॉल से आंसू ला देता तो हंसी भी

फोकस बनाए रखा और खुद को कैसे एंटरटेन करने पर लेफ्टिनेंट कमांडर प्रतिभा जम्वाल ने कहा कि इस अभियान के लिए हमें फिजिकली और मेंटली ट्रेंड किया गया था। हम किताबें, मूवी, म्यूजिक साथ लेकर आए हैं। पर इन आठ महीने में कई बार लगा कि हमारे आपस में बात करने के लिए टॉपिक ही खत्म हो गए है। घर से आना वाला एक फोन कॉल जहां आंसू ले आता था, वहीं खुशी की बहार भी।

तूफान से टकराने और बचने के मिले अनुभव

लेफ्टिनेंट पायल गुप्ता ने बताया कि मैं यहां रनिंग मिस कर रही हूं। बोट इतनी छोटी है कि इसमें मुश्किल से चल पाते हैं। एक बार जब जमीन पर आते हैं तो आगे बढ़ने की तैयारी में इतने बिजी होते हैं कि अपनी फिटनेस की फिक्र करने का वक्त नहीं मिलता। लेफ्टिनेंट विजया ने रोमांचक पल शेयर करते हुए बताया कि इस दौरान स्पर्म व्हेल , हजारों डॉलफिन, कई तरह के पेंग्विन दिखे। तूफान से टकराना और बचना भी ऐसा अनुभव था जो शायद कभी नहीं मिलता अगर हम इस सफर पर नहीं होते।

21600 नॉटिकल मील से ज्यादा की यात्रा

नाविका सागर परिक्रमा का मिशन 21,600 नॉटिकल मील से ज्यादा का सफर तय कर उसी जगह पर पूरा होगा, जहां से शुरू हुआ था। इस सफर पर 17 मीटर की एक नाव पर इंडियन नेवी की 6 महिला अधिकारी निकली। इस सफर के पांच चरण थे। क्रू मेंबर राशन भरवाने या मरम्मत के काम के लिए चार बंदरगाहों-ऑस्ट्रेलिया का फ्रीमेंटल, न्यूजीलैंड कालाइटलेटन, फॉक्लेंड्स का पोर्टसिडनी, साउथअफ्रीका का केपटाउन पर रुके।

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