सीएम के जनता दरबार में मीडिया बैन! क्या उत्तरा प्रकरण के बाद मुख्यमंत्री खौफ में?

देहरादून(दीपिका रावत)- जितने भागीदारी एक देश को चलाने के लिए प्रधानमंत्री-सीएम औऱ मंत्री-विधायकों, नेताओं की होती है ठीक वैसी ही भागीदारी लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहलाए जाने वाले मीडिया की भी होती है. देश हो या राज्य मीडिया मुख्य भूमिका निभाती है. अब चाहे शिक्षिका उत्तरा बहुगुणा के प्रकरण को ही देख लीजिए…सीएम के जनता दरबार में जिस तरह से शिक्षिका और सीएम का बर्ताव था दोनों ही गलत थे…और ये प्रकरण राज्य ही नहीं देशव्यापी हो गया. आज हर कोई शिक्षिका प्रकरण से रुबरु है. यहां तक की खबर है कि शिक्षिका को बिग बॉस तक का बुलावा आया लेकिन शिक्षिका का कहना है कि उन्होंने साफ मना कर दिया. ये किसके करण हुआ सिर्फ मीडिया.

सीएम के जनता दरबार में मीडिया बैन

लेकिन ये बेहद निराशाजनक बात है कि मुख्य भागीदारी निभाने वाली मीडिया को बैन कर दिया गया है. जी हां मीडिया रिपोर्ट की मानें तो कहा जा रहा है कि सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने अपने जनता दरबार में लोकतंत्र के चौथे स्तंभ यानि की मीडिया को सीएम जनता दरबार में बैन कर दिया गया है.

क्या शिक्षिका प्रकरण के बाद खौफ में हैं सीएम?

शिक्षिका प्रकरण से सब रुबरु हैं. लेकिन मीडिया को चाहने वाले सीएम ने अचानक अपने दरबार में मीडिया को बैन क्यों कर दिया. क्या सीएम त्रिवेंद्र रावत शिक्षिका प्रकरण के बाद खौफ में आ गए हैं???

कहीं डर इस बात का तो नहीं कि फिर कोई फरियादी ऐसा न करे औऱ सीएम आपा न खो बैठें

कहीं ऐसा तो नहीं की सीएम को डर है कि फिर को फरियादी ऐसा न करें और वो अपना आपा न खो दें औऱ फिर से किरकिरी न हो…शिक्षिका प्रकरण में मीडिया से लेकर लोगों ने फोने से वीडियो रिकॉर्ड की औऱ वायरल हो गई थी जिससे सीएम का खूब विरोध हुआ..

धुमाकोट में झेलना पड़ा ग्रामीणों का विरोध

पौड़ी में हुई बस हादसे के बाद घटनास्थल का जायजा लेने पहुंचे सीएम त्रिवेंत्र रावत को वहां भी लोगों का विरोध झेलना पड़ा औऱ एक बार फिर वीडियो वायरल हुई. सोशल मीडिया पर एक बार फिर ये वीडियो वायरल हुई.

राज्य सरकार का कर्मचारी आइंदा से जनता दरबार में नहीं आ सकेगा

मुख्यमंत्री के मीडिया को ऑर्डिनेटर दर्शन सिंह रावत ने बताया कि मीडिया के साथ-साथ कोई भी राज्य सरकार का कर्मचारी आइंदा से जनता दरबार में नहीं आ सकेगा। कर्मचारी भी अब अपनी शिकायत सिर्फ अपने उच्चाधिकारियों तक ही बता सकते हैं। हालांकि इसके लिए अभी कोई नोटिस जारी नहीं किया गया है लेकिन मुख्यमंत्री के मीडिया को ऑर्डिनेटर दर्शन सिंह रावत का कहना है कि जल्द ही नए प्रतिबंध सख्ती से लागू किए जाएंगे.

अब से जनता दरबार सिर्फ उन्हीं के लिए है जिनकी छुटपुट समस्याएं हैं

इससे तो साफ होता है कि सरकार छोटी मोटी समस्या को लेकर ही जनता दरबार का नाटक कर रही है. क्यों कि कई लोग नौकरी तो कर रहे हैं लेकिन स्थिति में ये सरकार अच्छे से जानती है इसीलिए अब से जनता दरबार सिर्फ उन्हीं के लिए है जिनकी छुटपुट समस्या है. औऱ वो भी पूरी होगी की नहीं को गारंटी नहीं.

देखने वाली बात ये है कि आखिर कब तक सीएम त्रिवेंद्र रावत अपने जनता दरबार से मीडिया को दूर रखते हैं या खुद बाहर आकर कितना मीडिया के सामने आते हैं.

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