वो सिर्फ कड़क मिजाज़ काबिल अफसर नहीं बल्कि रहमदिल डॉक्टर भी हैं

चम्पावत के जिलाधिकारी डॉ. अहमद इकबाल मरीज को देखते हुए

बेशक दुरूह भूगोल वाले राज्य उत्तराखंड की बदहाल चिकित्सा व्यवस्था पर उन चिकित्साधिकारियों को तरस न आता हो जो राज्य के स्वास्थ्य महकमे तैनात हैं। लेकिन इस राज्य के कुछ ऐसे रहमदिल प्रशासनिक और काबिल पुलिस आफिसर भी हैं जिनका दिल लाचार मरीज को देखकर पसीज जाता है।

इन्हीं मे से एक हैं चम्पावत के जिलाधिकारी डॉ. अहमद इकबाल और ऊधमसिंह नगर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक आइपीएस डॉ. सदानंद एस दाते। दोनों अधिकारी डॉक्टरी की पढ़ाई कर चुके हैं। प्रशासनिक सेवा में आने से पहले दोनों अधिकारी अस्पतालों में अपनी सेवा भी दे चुके हैं। लेकिन जब से प्रशासनिक और पुलिस सेवा के अपने लक्ष्य को हासिल किया है चिकित्सा के पेशे से दूरी बन गई।

उधमसिंहनगर के एसएसपी सदानंद दाते पुलिसकर्मी की नब्ज परखते हुए

लेकिन जब उत्तराखंड में स्वास्थ्य सेवाओं का हाल देखा तो फिर से प्रशासनिक सेवाओं के साथ –साथ डॉक्टरी का आला भी थाम लिया। चंपावत के जिलाधिकारी डॉ. अहमद इकबाल बतौर जिलाधिकारी अपने दायित्वों को पूरा करने के साथ ही जिला अस्पताल में रोजाना चिकित्सा सेवाएं भी दे रहे हैं।

हाल ही मेडिकल काउंसिल उत्तराखंड में रजिस्ट्रेशन होने के बाद अब उन्होंने बाकायदा समय तय कर लिया है कि हर रोज जिला अस्पताल में एक घंटा बैठकर मरीजों को देखेंगे। 2009 में एमबीबीएस करने वाले डॉ. अहमद 2011 बैच के आइएएस हैं। अस्पताल की व्यवस्थाओं के साथ-साथ अब मरीजों नब्ज देखने के लिए जिला अस्पताल को वक्त देने वाले  डॉ. अहमद इकबाल उत्तर प्रदेश के कानपुर के रहने वाले हैं। उनके पिता किसान हैं।

वहीं उधमसिंहनगर के एसएसपी डॉ. सदानंद दाते 2002 के एमबीबीएस पास हैं। साल 2007 में आइपीएस बनने के बाद हालांकि पेशागत चुनौतियों के चलते चिकित्सा जगत से दूरी बन गई बावजूद इसके अब भी वे वक्त मिलने पर जरूरतमंदों को चिकित्सकीय परामर्श जरूर देते हैं।  डॉक्टर बनकर मरीजों को देखने की जो तमन्ना थी, उसे डॉ. दाते अब अपने ही स्टाफ या उनके परिवार वालों की नब्ज देखकर पूरा करते हैं।

ऊधमसिंह नगर जिले में कोई पुलिसकर्मी या उनका परिजन बीमार हो जाए तो सबसे पहले परामर्श लेने डॉ. दाते के पास पहुंचता है। डॉ. दाते कहते हैं, डॉक्टर बनने का सपना था। एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी की और मैंने दो साल तक नासिक में बतौर मेडिकल ऑफिसर काम किया।भारतीय पुलिस सेवा में चयन होने के बाद डॉक्टरी पेशे की ओर बहुत ज्यादा ध्यान नहीं दे पाया, पर अब कोशिश यह करता हूं कि मेरे स्टाफ के जो कर्मचारी हैं, उन्हें स्वास्थ्य परामर्श देता रहूं। इससे मेरा भी अभ्यास होगा।

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